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Monday, March 1, 2010

तेरे चहरे में उस खुदा की इबारत नज़र आती है

मेरी नन्ही परी अनुष्का


लोग कहते हैं कि गुज़रा ज़माना कभी लौट कर आता नहीं
लेकिन तेरी हर शरारत में अपना बचपन मैं जिया करती हूँ

यूँ तो कर देते हैं बैचेन छुपे हुए कुछ गम जो यादों में मेरी
पर तेरी नटखट सी हँसी इस जीवन में सुकून भर देती हैं

ना देखा हैं कभी भी कही उस खुदा का चहरा मैंने
तेरे चहरे में उस खुदा की इबारत ही नज़र आती हैं

इक पल में ही पा लेती हूँ ज़मीं पर ज़न्नत की ख़ुशी
जब तेरी नाज़ुक उंगलियाँ मेरे गालों को सहलाती हैं

जब भी तेरे नन्हे कदम मेरे आँगन में थिरक उठते हैं
झरने लगते हैं फूल कई और हवाएं भी गुनगुनाती हैं

चहक उठती हूँ मैं मिल जाता हैं करार दिल को
जो तू आकर अचानक मेरे सीने से लिपट जाती हैं

ऐसा लगता हैं जैसे "खुदा का नूर" मुझमे आ समाया हैं
जब तू अपने कोमल लबों से मुझे "माँ" कह कर बुलाती हैं

अनुष्का के साथ प्यार भरे पल