मेरी नन्ही परी अनुष्कालोग कहते हैं कि गुज़रा ज़माना कभी लौट कर आता नहीं
लेकिन तेरी हर शरारत में अपना बचपन मैं जिया करती हूँ
यूँ तो कर देते हैं बैचेन छुपे हुए कुछ गम जो यादों में मेरी
पर तेरी नटखट सी हँसी इस जीवन में सुकून भर देती हैं
ना देखा हैं कभी भी कही उस खुदा का चहरा मैंने
तेरे चहरे में उस खुदा की इबारत ही नज़र आती हैं
इक पल में ही पा लेती हूँ ज़मीं पर ज़न्नत की ख़ुशी
जब तेरी नाज़ुक उंगलियाँ मेरे गालों को सहलाती हैं
जब भी तेरे नन्हे कदम मेरे आँगन में थिरक उठते हैं
झरने लगते हैं फूल कई और हवाएं भी गुनगुनाती हैं
चहक उठती हूँ मैं मिल जाता हैं करार दिल को
जो तू आकर अचानक मेरे सीने से लिपट जाती हैं
ऐसा लगता हैं जैसे "खुदा का नूर" मुझमे आ समाया हैं
जब तू अपने कोमल लबों से मुझे "माँ" कह कर बुलाती हैं
लेकिन तेरी हर शरारत में अपना बचपन मैं जिया करती हूँ
यूँ तो कर देते हैं बैचेन छुपे हुए कुछ गम जो यादों में मेरी
पर तेरी नटखट सी हँसी इस जीवन में सुकून भर देती हैं
ना देखा हैं कभी भी कही उस खुदा का चहरा मैंने
तेरे चहरे में उस खुदा की इबारत ही नज़र आती हैं
इक पल में ही पा लेती हूँ ज़मीं पर ज़न्नत की ख़ुशी
जब तेरी नाज़ुक उंगलियाँ मेरे गालों को सहलाती हैं
जब भी तेरे नन्हे कदम मेरे आँगन में थिरक उठते हैं
झरने लगते हैं फूल कई और हवाएं भी गुनगुनाती हैं
चहक उठती हूँ मैं मिल जाता हैं करार दिल को
जो तू आकर अचानक मेरे सीने से लिपट जाती हैं
ऐसा लगता हैं जैसे "खुदा का नूर" मुझमे आ समाया हैं
जब तू अपने कोमल लबों से मुझे "माँ" कह कर बुलाती हैं