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रोशन है कायनात दीवाली की रात है
उल्फ़त के दीप दिल में जलाओ तो बात है
उल्फ़त के दीप दिल में जलाओ तो बात है
नफ़रत की आग दिल में, जलाकर मिलेगा क्या
रोशन महल उन्हीं के हैं, जिनकी बिसात है
जगमग है एक ओर महल, और इक तरफ़
कुछ घर के दियों को तो अंधेरों से मात है
त्यौहार अधूरे से हैं, खुशियां हैं अधूरी
अपनों से अपने पास हों तो कोई बात है
दिल की तिजोरियों में रहे, प्यार की दौलत
बढ़ती है बाँट कर बहुत, ये वो सौग़ात है
जलने लगे उल्फ़त के दीये, अमन के चिराग़
तब मान लीजिये कि, दीवाली की रात है
चाहत बुलंदियों की, कहां लेके आ गई
मुश्किल सफ़र है 'रानी' और कोई न साथ है

