
फिर सज गई शाम सिंदूरी
मैसम ने ली अंगड़ाई
मुझे याद तुम्हारी आई ......
फूलों पर गुन गुनाए भ्रमर
हर कली कली शरमाई
मुझे याद तुम्हारी आई ......
हंस हंसिनी चले रे घर को
चातक का कटा कलेश
चंदा ने भी अम्बर से
कैसी प्रेम सुधा बरसाई
मुझे याद तुम्हारी आई ....
राह तकत तट थकी राधिका
देखो जमुनाजी लहराई
कोई तान मधुर, तुम छेड़ मनोहर
आजाओ कृष्ण कन्हाई
मुझे याद तुम्हारी आई.....
प्रीत का रोग भी अजब अनोखा
हर आहट दिल को देती धोखा
फूल कदम के चुन चुन कर
देखो सुन्दर सेज सजाई
मुझे याद तुम्हारी आई ......
फिर सज गई शाम सिंदूरी
मौसम ने ली अंगडाई
मुझे याद तुम्हारी आई ...