Thursday, February 11, 2010
शिव भजन
अमेरिका का स्नो फ़ॉल हमारे अंदाज़ से (न्यू यार्क से सचित्र)
अजी ये तो अभी शुरुआत हुई है ...........आगे आगे देखते जाइए !!
अब नज़ारा कुछ और है ....रेल की पटरी बनाती हुई बिटिया अनुष्का ..!!
ठंडा तो बहुत है मौसम, पर अपनी गुड़ियाँ को घुमाना है ....ना !!(अनुष्का )
अब देखिये पहला द्रश्य इस तरह बदल गया है ...!!
घर के पीछे वाले आँगन से लिया गया द्रश्य ....!!!
तकरीबन १६ इंच बर्फ गिरी ......सारा जन जीवन अस्त व्यस्त !!
Wednesday, February 10, 2010
आयो फागनियो (फाग गीत )
रंग रंगीले फूल खिले
पुरवैया ठंडी आए
की आयो फागनियो
की आयो जी फागनियों..
लाल हरी चुनर न ओढू
बस पिली ओढ़नी भाए
रंगादो मोहे फागनियों
की आयो जी फागनियों...
देवरजी जो करे ठिठोरी
सैयाजी की याद सताए
की आयो फागनियों
की आयोजी फागनियो...
संग ननद के फाग मैं खैलू
सासुजी भौवें चड़ाए
की आयो फागनियो
की आयोजी फागनियों...
चौक चोबारे निकलू कैसे
सब भर भर रंग उड़ाए
की आयो फागनियों
की आयोजी फागनियों ....
आम्बी से देखों बाग भर रहे
इमली को मन ललचाए
की आयो फागनियों
की आयोजी फागनियों...
डारे मो पे रंग पियाजी
मोहे प्रीत को रंग बहकाए
की आयो फागनियों
की आयोजी फागनियो़ं
Tuesday, February 9, 2010
बन बैठा इंसान दरिंदा (सामाजिक संकट )

बन बैठा इंसान दरिंदा, तौबा इसकी बुरी नज़र ।
कहाँ कहाँ बच पाएगीं लड़कियां, हर जगह इन्हें लुटेरों का डर ।।
नर्क बना रहे जीवन इनका, इज्जत को इनकी छीन कर ।
ये भी माँ, बहन, किसी कि बेटी है, खुद अपने घर में डाल नज़र ।।
ना भरोसा आस पड़ोस का, ना बचा यकीन किसी रिश्तेदार पर ।
कहाँ कहाँ बच पाएगीं लड़कियां, हर जगह इन्हें लुटेरों का डर ।।
औरत के बदन मैं बस, उसकी इज्जत ही सांसे लेती है ।
दो मुक्ति भय से इसको भी, क्यों डरी डरी ये रहती है ।।
भय भरा है मन में दरिंदो का, स्वछंद भ्रमण अधिकार दो ।
ये विश्व सृजन की भागी है, इसे इज्जत दो सत्कार दो ।।
कोलेज , बस्ती में जीना मुश्किल, छेडी जाती है हर गाँव शहर ।
कहाँ कहाँ बच पाएगीं लड़कियां, हर जगह इन्हें लुटेरों का डर ।।
उन्नति की ये पहचान है, इसे पढ़ना आगे बड़ना है ।
पापी इसके प्रतिकार से डर, बिन मौत तुझे क्यों मरना है ।।
ना इसका सीना छलनी कर, ऐसी ओछी दुराचारी कर ।
इसने ही रचा है तुझको भी, ना खुद ईश्वर से गद्दारी कर ।।
हर देश सदा आगे बड़ पाया, एक शुद्ध समाज की नीव पर ।
कहाँ कहाँ बच पाएगीं लड़कियां, हर जगह इन्हें लुटेरों का डर ।।