Monday, January 25, 2010

सब सपनों को साकार करे (गणतंत्र दिवस)











नई भौर में,
नए छोर से,
साध कर नए लक्ष्य कई
नवल यतन कर,
नवयौवन संग,
पलको में,
नव स्वप्न लिए
सभी विधा में,
सभी क्षेत्र में
टाके नई उपलब्धियां
छोड़े छोटी सोच पुरानी
सभ्यता को समृद्ध करे
शिक्षा का हो,
अधिकार सभी को
नवप्रतिभा को,
मिले पहचान
राजनीति रहे गंगा सी
घर घर पहुचाए विज्ञान
तकनिकी में,
जा पहुचे शिखर पर
समाज संस्कारो का,
प्रतिबिम्ब बने
दिल जुड़ जाए सबके
प्रेम से
जात -पात के सब
मिटे निशाँ...
बस प्रेम धर्म हो
इस "गणतंत्र" का
सब मिल आज यही
संकल्प धरे
आशाओ की डोर लिए हम
सब सपनों को साकार करे













7 comments:

महफूज़ अली said...

गणतंत्र दिवस की आपको बहुत शुभकामनाएं....

Mithilesh dubey said...

गणतंत्र दिवस की आपको बहुत शुभकामनाएं..

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

बहुत सुन्दर भाव है, टंकण त्रुटियो को सुधार लेवे.

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं.

'अदा' said...

गणतंत्र दिवस की आपको शुभकामनाएं...

khozema said...

Deshbhakti se bharpur ek acchi rachna........

SACCHAI said...

" sunder bhav ke saath saji aapki rachana behad pasand aayi aapko aapki is bahumuly rachna ke liye badhai "

" आपको गणतंत्र दिवस की बहुत शुभकामनाएं |"

----- eksacchai { AAWAZ }
http://eksacchai.blogspot.com

संजय भास्कर said...

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com