Friday, February 26, 2010

आया अलबेला त्यौहार रंगीला होली का [होली गीत]














आया अलबेला त्यौहार रंगीला होली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली का

लपट झपट कर निकली घर से
मुख घूँघट पट में छुपाए
लाख जतन कर प्रियतम खोजे
प्रिया को ढूंढ़ ना पाए
अल्हड़ नाद उठे मस्तो की टोली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली का

आज तो मन का मेल मिटा
सब लोग गले मिलते है
जहाँ दिलो में प्रेम
ख़ुशी के फूल वही खिलते है
पिचकारी की धार बरसाए रंग रोली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचौली का

फागुन की ऋतु सतरंगी
हिल मिल प्रेम का रंग उड़ाए
संग मिले सब मद मस्ती में
भंग का रंग जमाए
ना रूठो तुम कि दिन है ठेल ठिठोली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली का

आया अलबेला त्यौहार रंगीला होली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली का

28 comments:

'अदा' said...

फागुन की ऋतु सतरंगी
हिल मिल प्रेम का रंग उड़ाए
संग मिले सब मद मस्ती में
भंग का रंग जमाए
ना रूठो तुम कि दिन है ठेल ठिठोली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली का
holi ke tyohaar ka bahut sundar bimb kheencha hai..
fagunaai hui kavita...bahut acchi lagi..
holi ki badhai.

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर गीत है, वाह!!

आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

-समीर लाल ’समीर’

M VERMA said...

आया अलबेला त्यौहार रंगीला होली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली का
सुन्दर गीत
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

लपट झपट कर निकली घर से
मुख घूँघट पट में छुपाए
लाख जतन कर प्रियतम खोजे
प्रिया को ढूंढ़ ना पाए
अल्हड़ नाद उठे मस्तो की टोली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली का

गीत में होली का रंग और मस्ती साफ झलक रही है!
बहुत सुन्दर!
होली की शुभकामनाएँ!

मन में आशायें लेकर के,
आया हैं मधुमास,
चलो होली खेलेंगे।
सुन्दर है संगीत,
मिलन का गीत सुनाओ,
त्योहारों की रीत,
गले से अब लग जाओ,
नेक विचारों को लेकर के,
उत्सव है ये खास,
चलो होली खेलेंगे।
खुशियों की सौगात लिए,
होली आयी है,

चाँदी जैसी रात लिए,
होली आयी है,
सूर्य उजाले लेकर के
लाया है धवल प्रकाश,
चलो होली खेलेंगे।

श्यामल सुमन said...

लाख जतन कर प्रियतम खोजे
प्रिया को ढूंढ़ ना पाए

सुन्दर भाव की पंक्तियाँ रानी जी।

क्या वसंत का मोल है जब ना प्रयतम पास।
कोयल की हर कूक में पिया मिलन की आस।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

राजीव तनेजा said...

सुन्दर गीत....होली मुबारक

डॉ. मनोज मिश्र said...

फागुन की ऋतु सतरंगी
हिल मिल प्रेम का रंग उड़ाए
संग मिले सब मद मस्ती में
भंग का रंग जमाए
ना रूठो तुम कि दिन है ठेल ठिठोली का...
बहुत सुंदर...

आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

Kaviraaj said...

बहुत अच्छा । सुदर प्रयास है। जारी रखिये ।

अगर आप हिंदी साहित्य की दुर्लभ पुस्तकें जैसे उपन्यास, कहानियां, नाटक मुफ्त डाउनलोड करना चाहते है तो कृपया किताबघर से डाउनलोड करें । इसका पता है:

http://Kitabghar.tk

दीपक 'मशाल' said...

दिल से तारीफ करनी होगी आपके इस बहुत सुन्दर होली गीत की...
होली की शुभकामनाएं...

sangeeta swarup said...

खूबसूरत गीत होली का....

होली की शुभकामनायें

Pawan Nishant said...

milayenge gala unse sare bazar holi mai
hai nahi mumkin ki woh kar saken inkar holi mai
badhiya rachna ke liye badhai.

डॉ टी एस दराल said...

होली पर बढ़िया रचना ।
आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें।

निर्मला कपिला said...

फागुन की ऋतु सतरंगी
हिल मिल प्रेम का रंग उड़ाए
संग मिले सब मद मस्ती में
भंग का रंग जमाए
ना रूठो तुम कि दिन है ठेल ठिठोली का...
बहुत सुन्दर रचना होली की शुभकामनायें

kshama said...

फागुन की ऋतु सतरंगी
हिल मिल प्रेम का रंग उड़ाए
संग मिले सब मद मस्ती में
भंग का रंग जमाए
ना रूठो तुम कि दिन है ठेल ठिठोली का
गोरी खेल रही है खेल, आँख मिचोली का
Waah!
Holee kee anek shubhkamnayen!

Dr Satyajit Sahu said...

जय हो कृष्ण कन्हाई
आपको होली की बधाई

रवीन्द्र प्रभात said...

आप और आपके परिवार को होली की शुभकामनाएँ...

aakhar.org said...

प्रिय रानी जी,
आपको मेरी कविता पसंद आई इसके लिए आपका बहुत शुक्रिया. आपके ब्लॉग का चक्कर लगाया और आपके रचनात्मक और सार्थक प्रयाशो का कायल बन गया हूँ. बहुत बहुत बधाई आपको.
अपनी रचनाये "आखर " के लिए भी भेजे.
आपका
चंद्रपाल सिंह,
mumbai

शहरोज़ said...

आप सभी को ईद-मिलादुन-नबी और होली की ढेरों शुभ-कामनाएं!!
इस मौके पर होरी खेलूं कहकर बिस्मिल्लाह ज़रूर पढ़ें.

Amit Kumar said...

सुन्दर गीत हेतु आभार..होली की बधाइयाँ.

बेचैन आत्मा said...

सुंदर भाव.
होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ

देवेश प्रताप said...

बहेतरीन गीत ......होली कि ढेर सारी शुभकामनयें

संजय भास्कर said...

आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

ktheLeo said...

फ़ाल्गुनी रंग का अहसास कराती सुन्दर अभिव्यक्ति!

पर यह 'kavyamanjusha.blogspot.com' और ’काव्य तरंग’ का मसला नही समझ मे आया!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

रानी विशाल साहिबा, आदाब
.....
आज तो मन का मैल मिटा.सब लोग गले मिलते है
जहाँ दिलो में प्रेम.ख़ुशी के फूल वही खिलते है...
इस गीत के माध्यम से...
बहुत ही खूबसूरत और....
समाज के लिये ज़रूरी पैग़ाम दिया है आपने.
होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

पंकज said...

नैक उरै आ श्याम
तोपे रंग डारूं

नैक उरै आ...
लाल गुलाल मलूं तेरे मुख सौ
गालन पै गुलचां मारूं

होली की शुभकामनायें.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर गीत.

आपको होली पर्व की घणी रामराम.

रामराम

Vivek Rastogi said...

सुन्दर गीत ...

होली की शुभकामनाएँ!

OM said...

प्रिय रानी जी
होली की शुभ कामनाएं .
बहुत सुन्दर कविता है . आपकी सभी रचनाएं अत्यंत प्रभावशाली हैं.
ओंम प्रकाश नौटियाल