Wednesday, February 24, 2010

हम भी होली मना लेते है


रंग गुलाल सब बाज़ारों में
ख़ुशबू से महकती गलियां
चौपाटी की चहल पहल
खिल उठी वसंत में कलियाँ
नुक्कड़ पर यारों का जमघट
छेड़ छाड़ मस्ती का दौर
हर्षित मन हर जगह
खेले पिचकारी बच्चे सब ओर
सतरंगी सजी वसुंधरा
पक्षियों का
मृदु ऋतु गान
महुए की मदमाती सुगंध
फ़ाग गीतों की मधुर तान
मंडलियों
की हँसी ठहाक
गपशप की हुल्लड़ भंग छाक
देख लेते है....... यादों में अपनी
होली का ये रंगीन नज़ारा
यादों के रंग में भीग कर
यादों से ही बतीया लेते है

दूर विदेश में बैठे हुए हम
यादों के रंग से नहा लेते है
इस तरह वतन को याद कर
हम भी होली मना लेते है !!

32 comments:

मनोज कुमार said...

सरलता और सहजता का अद्भुत सम्मिश्रण बरबस मन को आकृष्ट करता है। होली है।

Udan Tashtari said...

चलिये...ऐसे ही होली मना लेते हैं..हम भी उसी नाव में हैं..

'अदा' said...

ham bhi ..usi naao mein baithe hai aur dar rahe hain...sameer ji...naao safe hai na :):)
ha ha ha ..
bura na maano holi hai...!!!

डॉ. मनोज मिश्र said...

महुए की मदमाती सुगंध
फ़ाग गीतों की मधुर तान
मंडलियों की हँसी ठहाक
गपशप की हुल्लड़ भंग छाक
देख लेते है....... यादों में अपनी..
खूबसूरत चित्रण,मन के भाव बखूबी व्यक्त हैं हर लाइनों में.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सतरंगी सजी वसुंधरा
पक्षियों का मृदु ऋतु गान
महुए की मदमाती सुगंध
फ़ाग गीतों की मधुर तान

प्रकृति का सुन्दर चित्रण!

होली का हुड़दंग मचा है,
गाँव-गली, घर-द्वारों में।
धर सोलह सिंगार धरा ने,
अनुपम छटा बिखेरी है,
खेत, बाग, वन-मन-उपवन,
छाये हैं मस्त बहारों में।

Mithilesh dubey said...

अरे वाह दीदी , बहुत खूब , बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति रही आजकी , बधाई ।

श्यामल सुमन said...

खूब दिलाया परदेशी बन होली की यह याद।
सतरंगी होली बन जाए नहीं शेष अवसाद।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

देवेश प्रताप said...

होली पर बेहतरीन रचना ........बहुत खूब

Suman said...

इस तरह वतन को याद कर
हम भी होली मना लेते है .nice

राजीव तनेजा said...

सुन्दर...समयानुकूल रचना...
कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना ही पड़ता है

डॉ टी एस दराल said...

यादों के रंग में भीग कर
यादों से ही बतीया लेते है
दूर विदेश में बैठे हुए हम
यादों के रंग से नहा लेते है

सच , विदेश में रहकर होली का नज़ारा तो मिस करते होंगे।
होली के विभिन्न रंगों का बखूबी वर्णन किया है आपने।

ताऊ रामपुरिया said...

यादों के रंग में भीग कर
यादों से ही बतीया लेते है
दूर विदेश में बैठे हुए हम
यादों के रंग से नहा लेते है

बहुत सही वर्णन किया, होली की शुभकामनाएं.

रामराम.

योगेश स्वप्न said...

prakrati ke chitran se rangi holi ki mast rachna.

Amitraghat said...

"सुन्दर भावाभिव्यक्ति......"
प्रणव सक्सैना amitraghat.blogspot.com

Dr. Smt. ajit gupta said...

अरे भला आप ऐसे ही होली क्‍यों मनाएंगी? हम यहाँ से प्‍यार का रंग भेज रहे हैं, हमेशा आप गुलाब की तरह दिखेगी। होली की राम राम।

महफूज़ अली said...

यादों के रंग में भीग कर
यादों से ही बतीया लेते है
दूर विदेश में बैठे हुए हम
यादों के रंग से नहा लेते है
इस तरह वतन को याद कर
हम भी होली मना लेते है !!


इन पंक्तियों ने दिल को छू लिया....सुंदर कविता....

होली की शुभकामनाओं सहित....

संजय भास्कर said...

बहुत सही वर्णन किया, होली की शुभकामनाएं.

vikas said...

Holi ke pahle hi hum to is kavita rupee rang virange shabdo se sarabour ho gaye.Adbhut rachna...

VIKAS PANDEY

www.vicharokadarpan.blogspot.com

alka sarwat said...

अच्छी लगी कविता ,
होली की ढेर सारी रंगीन शुभ कामनाएं

दिगम्बर नासवा said...

यादों के रंग में भीग कर
यादों से ही बतीया लेते है
दूर विदेश में बैठे हुए हम
यादों के रंग से नहा लेते है
इस तरह वतन को याद कर
हम भी होली मना लेते है ..

वतन की याद करा दी आपने ... सुंदर रचना है ... होली की बहुत बहुत बधाई ........

sangeeta swarup said...

आप तो वतन से दूर हैं...पर हम यहाँ शहरों में भी बस ऐसे ही होली मना लेते हैं....सब अनजान से ही लगते हैं....
भावों की प्रस्तुति बहुत सुन्दर है....

होली की शुभकामनायें

arvind said...

सतरंगी सजी वसुंधरा
पक्षियों का मृदु ऋतु गान
महुए की मदमाती सुगंध
फ़ाग गीतों की मधुर तान
.......लाजवाब प्रस्तुति .
krantidut.blogspot.com

निर्मला कपिला said...

यादों के रंग में भीग कर
यादों से ही बतीया लेते है
दूर विदेश में बैठे हुए हम
यादों के रंग से नहा लेते है
इस तरह वतन को याद कर
हम भी होली मना लेते है !!
वाह क्या बात कही है । अपने देश जैसे तीज तौहार विदेश मे कहाँ मेरे बच्चे भी ऐसे ही सोच रहे होंगे। शुभकामनायें होली की मुबारकवाद।

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

KK Yadava said...

सुन्दर भावों से भरी रंगमय होली रचना.. उत्तम अभिव्यक्ति...बधाई.
_______________
शब्द सृजन की ओर पर पढ़ें- "लौट रही है ईस्ट इण्डिया कंपनी".

कमलेश वर्मा said...
This comment has been removed by the author.
कमलेश वर्मा said...

इस तरह वतन को याद कर
हम भी होली मना लेते है !!sunder abhivkti..badhayee aapko..

सहज साहित्य said...

बहुत अच्छी रचना ।रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

सुरेश यादव said...

होली के रंगों की याद कविता में इस कदर जिन्दा हुई है कि तन मन होली के अहसासों में सरावोर होगया है .रानी जी इस काव्य संवेदना के लिए हार्दिक बधाई.

दिनेश शर्मा said...

सुन्दर,अतिसुन्दर ।आपको भी होली पर हार्दिक शुभकामनाएं।

Arvind Mishra said...

वतन की याद और होली -भावनाओं से सराबोर मन

तिलक राज कपूर said...

आपने उस युग की याद दिला दी जब कविता की लय मन पर छा जाती थी, कविता की एक अलग ही छटा, एक अलग ही शब्‍दावली होती थी। मैं उस दौर की बात कर रहा हूँ जब मैं पढ़ता था स्‍कूल में यानि 60 का दशक।
भावों की बहुत अच्‍छी लयात्‍मक प्रस्‍तुति।

आनंद आ गया।

बधाई।