Sunday, March 14, 2010

तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..



मौसम के साथ चलिये कि लड़ना फ़िज़ूल है
तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..

इंसां नहीं कोई भी मुकम्मल जहान में
लेकिन नज़र में और की खामी है भूल है

तारीख में मिलेंगे उनके निशान तक....
जिनको साथ वक्त के चलना कबूल है.....

कश्ती का नाखुदा भी हुआ कितना बदगुमान
खुद को खुदा समझता है ये कैसी भूल है

शोहरत की दौड़ में ये जहां है, हुआ करे
"रानी" सुकूं है दिल को, तो सब कुछ फ़िज़ूल है

33 comments:

AMIT TIWARI 'Sangharsh' said...

अच्छे शब्दों और प्रासंगिक भावनाओं के साथ एक अच्छी कविता.... प्रशंसनीय..

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत अच्छी कविता.... प्रशंसनीय...नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये ...

M VERMA said...

तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..
वक्त की नब्ज आपने पकड़ ली.
बहुत सुन्दर

'अदा' said...

bahut hi accha likha hai...aaj ke sandarbh mein sahi aur sateek..

विनोद कुमार पांडेय said...

तारीख में मिलेंगे न उनके निशान तक....
जिनको न साथ वक्त के चलना कबूल है.....


har ek lyne behtareen sundar kavita..badhai

डॉ. मनोज मिश्र said...

इंसां नहीं कोई भी मुकम्मल जहान में
लेकिन नज़र में और की खामी है भूल है..
बहुत सुंदर.

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!

Arvind Mishra said...

सुन्दर और सकारात्मक -शुक्रिया !

योगेश स्वप्न said...

शोहरत की दौड़ में ये जहां है, हुआ करे
"रानी" सुकूं है दिल को, तो सब कुछ फ़िज़ूल है

bahut khoob. sabhi sher behatareen.

देवेश प्रताप said...

बहुत लाजवाब ...लिखा आपने ..

MADHUKAR SARAN said...

अच्छी कविता..आप को नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं !!

पारूल said...

मौसम के साथ चलिये कि लड़ना फ़िज़ूल है
तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..

vaah!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..
वाह, रानी साहिबा, इस मिसरे पर इतनी खूबसूरत ग़ज़ल.....
तारीख में मिलेंगे न उनके निशान तक....
जिनको न साथ वक्त के चलना कबूल है..
ये शेर तो हासिल ग़ज़ल है आपका.
मुबारक हो..

ताऊ रामपुरिया said...

शोहरत की दौड़ में ये जहां है, हुआ करे
"रानी" सुकूं है दिल को, तो सब कुछ फ़िज़ूल है


वाह...बिल्कुल सोलह आने सच्ची बात, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

Nitin said...

Bahut badiya likha hai.
Bas thoda "Nukta" lagane ka dhyan rakhiye.

संजय भास्कर said...

सुन्दर और सकारात्मक -शुक्रिया !

संजय भास्कर said...

मेरे पास शब्द नहीं हैं!!!!
tareef ke liye didi ji

इस्मत ज़ैदी said...

मौसम के साथ चलिये कि लड़ना फ़िज़ूल है
तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..

इंसां नहीं कोई भी मुकम्मल जहान में
लेकिन नज़र में और की खामी है भूल है

सुंदर और सच्ची ग़ज़ल

anita said...

bahut acha...tabdiliya to waqt ka pahla usool hai...

anita said...

bahut acha...tabdiliya to waqt ka pahla usool hai...

Udan Tashtari said...

मौसम के साथ चलिये कि लड़ना फ़िज़ूल है
तब्दीलियां तो वक़्त का पहला उसूल है..


-बहुत गज़ब की पंक्तियाँ...बहुत बढ़िया.

खुशदीप सहगल said...

वी कैन चेंज का नारा देकर ही ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बन गए...

सच बदलाव का दूसरा नाम ही जीवन है...

जय हिंद...

Prarthana gupta said...

ap achcha likhtin hain......even i write,prars.blogspot.com

Prarthana gupta said...

ap achcha likhtin hain......even i write,prars.blogspot.com

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत ही सुन्दर रचना प्रस्तुत की है आपने तो!
भारतीय नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!

सुमन'मीत' said...

अच्छी दिशा दिखाती हुई रचना
सुमन ‘मीत’

गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर'' said...

इस सचाई को उजागर किया बहुत खूब जी
कश्ती का नाखुदा भी हुआ कितना बदगुमान
खुद को खुदा समझता है ये कैसी भूल है

हरकीरत ' हीर' said...

बहुत खूब रानी जी ये सुकूँ यूँ ही बना रहे ......!!

संगीता पुरी said...

वाह .. क्‍या बात है !!

Kulwant Happy said...

अद्भत।

ज्योति सिंह said...

तारीख में मिलेंगे न उनके निशान तक....
जिनको न साथ वक्त के चलना कबूल है
waah kya baat hai
bahut hi shaandaar lagi ye rachna .

SR Bharti said...

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति ,
इन्सान नहीं है कोई मुकम्मल जहाँ में

Gaurav Sangtani said...

शोहरत की दौड़ में ये जहां है, हुआ करे
"रानी" सुकूं है दिल को, तो सब कुछ फ़िज़ूल है
bahut sach kaha.....